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Showing posts with the label शायरी / Shayari

-------------------------- Ishq --------------------------------

  Kisi ne Dr.Iqbal se poocha: Aqal ki inteha kiya hey? Dr. Iqbal replied: Heyrat Phir poocha: Heyrat ki inteha kiya hey? Allama replied:  Ishq Phir poocha: Ishq ki inteha kiya hey? Dr. Iqbal replied: Ishq La-Inteha hey Phir poocha: Magar aap ne likha hey “ Teray ishq ki inteha chahta hoon ” Dr. Iqbal replied to this :  Tou doosray misray mein apni ghalti ka aiteraf kiya hey “ Meri saadgi dekh kiya chahta hoon ”.

------------------------ चेहरा सच बताता है क्या -------------------------

चेहरा सच बताता है क्या सोचता  हूँ मैं और सोचता ही रहता हूँ  पहला चेहरा माँ का  क्या कभी बताया उसने की  भर पेट निवाला खाया उसने  दूसरा चेहरा शिक्षक  का  उसने कभी बताया क्या की आज कौन सी सज़ा मिलेगी  तीसरा चेहरा दोस्त का  उसने कभी  बताया , क्या शरारत सूझी उसको   इसी  तरह कई ओर  चेहरे  रोजमर्रा की जिंदगी से  क्या कभी सच बोलेंगे  सोचता  हूँ मैं और सोचता ही रहता हूँ कहते हैं खुदा ने इंसान को खुद का अक्स ही बनाया है  उसका चेहरा क्या मैं पड़ पाऊंगा   अगर वो सामने आ जाये  सोचता  हूँ मैं और सोचता ही रहता हूँ हाँ एक चेहरा पिछले दिनों मैं पढ़ पाया  पता नहीं कैसे मैं खुद हैरान हूँ  जब मेरी माँ ने आखरी समय हॉस्पिटल के Bed पर कहा   बेटा ध्यान रखना मैं अब चलती हूँ   वोह आंखे बोली ,  हाँ  वोह चेहरा बोला  सोचता  हूँ मैं , क्या चेहरे  ऐसे ही बोलते है  सो नहीं पाया हूँ तब से मैं  सोचता हूँ अब , चेहरे ना...

------------- दुश्मन का डर क्या ----------------

      तुम्हारी  कृपा   है   तो  दुश्मन   का  डर  क्या    तुम्हारे   गुलामो   को    खोफो  खतर  क्या    कृपा   की   नज़र   से   जो   तुम   देखते   हो   करेगी   किसी  की   भला   बद-नज़र   क्या   बनाते    हो   बिगड़ी  हुई   बात   जब   तुम    बिगाड़े  का  ना - चीज़  कम  तर  बशर  क्या    गरीबो   के  अश्रु -बिंदु  पर  जो  तुम  न   रूठो     तो  कर  ले  लेगा  सारा  जहाँ  रूठ   कर  क्या  !

If You Desire To Reach Your Goal ------

Taskeen na ho jis se wo raaz badal dalo Jo raaz na rakh paye hum-raaz badal dalo Tum ne bhi suni hogi bari aam kahawat hey Anjam ka ho khatra aghaz badal dalo Pur-soz dilon ko jo muskan na dey paye Sur hi na milay jis mein wo saaz badal dalo Dushman kay iradon ko hey zahir agar kerna Tum khel wohi khelo andaz badal dalo Aey dost karo himmat kuch door sawera hey Agar chahtay ho manzil tou perwaz badal dalo

--------- ਤੇਨੂ ਹੈ ਰਾਧਾ ਰਾਨੀ ਦੀ ਸਹੁੰ ----------

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ਜੇ  ਸਾਡੀ  ਲਾਜ  ਬਚਾਈ  ਨਾ  ਤੂ                     ਤੇਨੂ  ਹੈ  ਰਾਧਾ  ਰਾਨੀ  ਦੀ  ਸਹੁੰ --- ਗਵਾਲਾ  ਦੀ  ਗੇਂਦ  ਲੇਯੋਨ  ਖਾਤਿਰ ਛਾਲ  ਜਮਨਾ  ਵਿਚ  ਮਾਰੀ  ਸੀ  ਤੂ ਕਾਲੀ  ਨਾਗ  ਜਿਥੇ  ਨਾਥ੍ਯਾ  ਸੀ ਤੂ ਤੇਨੂ  ਉਸ  ਜਮਨਾ  ਦੇ  ਪਾਣੀ ਦੀ  ਸਹੂੰ  ! ਜੇ  ਸਾਡੀ  ਲਾਜ  ਬਚਾਈ  ਨਾ  ਤੂ ਤੇਨੂ  ਹੈ  ਰਾਧਾ  ਰਾਨੀ  ਦੀ  ਸਹੁੰ  _ _ ਪਿਯਾਰ  ਦਾ  ਬੰਧਨ  ਪਾਈ   ਕੇ   ਪੁਤਰ  ਸੀ  ਤੇਨੁ   ਬਾਨਾ  ਲਿਯਾਂ

---------------- यह जीवन चंद दिन का है !!!!! --------------------

मुसाफिर क्यों पड़ा  सोता भरोसा है  न एक  पल  का दमादम  बज  रहा  डंका तमाशा  है  चला चल  का ! सुबह  जो तख्शाही  पर बड़े  सज  धज  के  बैठे  थे दुपहरे  वक़्त  में  उनका हुआ  है  बास  जंगल  का ! कहाँ  है  राम  और  लक्ष्मण कहाँ  रावन  से  बलधारी कहाँ  हनुमान  से  योद्धा पता  जिनके  न  था  बल  का  !

---------- कुछ अशायर फारसी के ----------

योगी  न   जती   अकीलो   दाना   न   बना  दे गर   शाम  बनाना   है   तो   दीवाना   बना  दे   वो  आह  दे   कि    जिस  से  पत्थर  भी  पानी वो  दर्द  दे  जो  तुझ  को   भी  दीवाना  बना  दे  _________________ हम भी सुकरात है एहदे नोके  तश्ना लभी न मर जाये यारो  जहर हो या मये आतशी हो  कोई जामे शहादत तो आये ___________________

इतना लिहाज कर लिया ----- दुनिया तेरा परे भी हट !

रहने दो अहह सर्द ही  अच्हा है रंग ऐ जर्द ही  रहने दो दिल में दर्द ही  हमको दवा से कार क्या ! नेकी बदी खुशी गमी जीना थी बामे यार की जीना जरा दो यार का  पानी पया के कार क्या ! चाहे कोई अच्हा कहे  खा बड़ा बुरा कहे  नाचू हु संग शाम के शर्मो हया से कार क्या !  इतना  लिहाज  कर  लिया   दुनिया  तेरा  परे  भी  हट   नाचू  हु  संग  शाम  के   शर्मो  हया  से  कार  क्या !

ऐ खुदा मेरी दुआओं में वो असर कर दे !

Is dasht kay sehra ko samandar ker dey Ya meri aankh kay har ashk ko patthar ker dey Aey Allah mein aur nahi kuch Tujh se maangta Meri chadar meray payron kay brabar ker dey Mujhay gayr na ley ye aatish-e-dunya kaheen Mujh per Apni Rehmat ka saya ker dey Mujhay khaak na ker dey meri hasti ka ghuroor Mujhay meray nafs se moutabar ker dey Aey Khuda meri duaon mein wo asar ker dey Maangu mein Tujh se qatra aur Tu samandar ker dey

दो आरजू में कट गए , दो इंतज़ार में (Do Aarzu Mein Kat Gaye , Do Intezar Mein )

लगता  नहीं  है  दिल  मेरा , उजड़े  दयार  में , किसकी  बनी  है  आलम -इ -ना   pai'डर  में , कह  दो  इन  हसरतों  से  कहीं  ओर  जा  के  बसें , इतनी  जगह  कहाँ  है  दिल -इ -दागदार  में , उम्र -इ -दराज़  मांग  कर  लाये  थे  चार  दिन, दो  आरजू   में  कट  गए ,  दो  इंतज़ार  में , कितना  है  बदनसीब  'ज़फर ' दफ़न  के  लीये , दो  गज  ज़मीन  भी  न  मिली  कु -इ -यार  में ...!!!

: : : : : शहं शाहे जहाँन ( Persian ) : : : :

शहं   शाहे    जहान   है  मईल   हुआ   है   क्यों          पेदा    कुने    जहान    है  डायल   हुआ   है     क्यों      खंजर   की   क्या    मजाल  ऐक   जखम   कर   सके  तेरा   ही   है   ख्याल   के  घायल    हुआ     है      तू    

शायरी / Shayari

एक   जरा   हाथ   बड़ा   दे   तो   पकड़   ले   दमन ,  उसके   सिने   में   समा   जाए   हमारी   धड़कन ,  इतनी   कुर्बत   है   तो   फासला   इतना   क्यों   है ?  कोई   ये   कैसे   बताए   के   वो   तन्हा   क्यों   है ?   इतदाये  इश्क  है  रोता  है  क्या  आगे  आगे  देखिये  होता  है  क्या  मकतबे  इश्क  का  दस्तूर  निराला   देखा  उस  को  छुटी   ना   मिली  जिस  को  सबक  याद  हुआ  ऐ   जोक   गर   है   होश   तो   दुनिया   से   दूर    भाग इस   मक्तबे  काम   नहीं   होशियार   का ( One who is enlightened ) हम जैसों की नाकामी पर क्यों हैरत है दुनिया को हर मौसम में जीने के आदाब कह...

यहाँ अब मेरे राजदाँ और भी हैं

Still Searching For Exact Version ------- ------ सितारों  से  आगे  जहान  ओर  भी  हैं अभी  इश्क  के  इम्तेहान  ओर  भी  हैं तही  ज़िन्दगी  से  नहीं  यह  फज़ाएँ यहाँ  संऐकड़ो  कारवां  ओर  भी  हैं काना'अत  न  कर  आलिम  ऐ  रंग  ओ  बू पर चमन  ओर  भी हैं , आशियन  ओर  भी  हैं अगर  खो  गया  ऐक  नशेमन  तो  क्या  ग़म मुकामआत  ऐ   आह  ओ  फाघन  ओर  भी  हैं तू  शाहीन  है , परवाज़  है  काम  तेरा तेरे  सामने  आसमां  ओर  भी  हैं इसी रोज़-ओ-शब में उलझकर ना रह जा, के तेरे ज़मन ओ मकान और भी हैं गए दिन की तनहा था मैं अंजुमन में यहाँ अब मेरे राज दाँ और भी हैं

ALLAH SAY's

Ay Ibn Adam! Aik teri chahat hai Aik meri chahat hai Hoga tu wohi jo Meri chahat hai ... Pas Agr tu ney sapurd kardiya apney ko uskey jo Meri chahat hai, Tu Mein baksh Donga tujhey jo teri chahat hai Agr tu ney mukhalfat ki uski jo Meri chahat hai tu Mein tujh ko thaka Donga usmein jo teri chahat hai, Akhir phir hoga wohi jo Meri chahat hai

Ishq Hamesha La-Hasil Nhin Hota........

majnoon ne shehar cchorra to sehra bhee cchorr day nazaray ki hawas ho to layla bhee chorr day wa'iz kamal-e-tark se yahan milti hai murad dunya jo cchorr di hai to uqba bhee cchorr day taqleed ki rawish se to behtar hai khudkushi rasta bhee dhoond, khizr ka sawda bhee chorr day manind-e-khama teri zuban par hai harf-e-ghair begaana shay pay nazish-e-be-jaa bhee chorr day lutf-e-kalam kia jo na ho dil me dard-e-ishq bismil nahin hai tu to tarrapna bhee chorr day shabnam ki tarah phoolon pe ro or chaman se chal is baagh me qayam ka sawda bhee cchorr day hai aashiqi me rasam sab se alag baithna but-khaana bhee, haram bhee, kaleesa bhee chorr day sodagari nahin yeh ibadat khuda ki hai ay bekhabar jazaa ki tamana bhee chorr day accha hai dil ke saath rahay pasbaan aqal lekin kabhi kabhi isay tanha bhee chorr day jeena woh kia jo ho nafs-e-ghayr par madaar shohrat ki zindagi ka bharosa bhee chorr day shokhi se hai sawal-e-mukarar me ay kaleem! shart-e-ra...

: : : : : : : ਫਾਸਲਾ : : : : : : : :

ਇਸ  ਤਰਹ  ਹੈ  ਜਿਸ  ਤਰਹ  ਦਿਨ  ਰਾਤ  ਵਿਚਲਾ  ਫਾਸਲਾ ਮੇਰੀਆਂ  ਰੀਝਾਂ ਤੇ  ਮੇਰੀ  ਔਕਾਤ  ਵਿਚਲਾ  ਫਾਸਲਾ ਲਫਜ਼  ਤਾ  ਸਾਊ  ਬਹੁਤ  ਨੇ  ਯਾ  ਖੁਦਾ  ਬਣ ਯਾ   ਰਹੇ ਮੇਰੀਆਂ  ਲਫਜਾਂ ਤੇ   ਮੇਰੇ  ਜਜਬਾਤ  ਵਿਚਲਾ  ਫਾਸਲਾ  ਹਾਂ  ਮੈਂ  ਆਪੇ  ਹੀ  ਕਿਹਾ  ਸੀ  ਹੋਂਠ  ਸੁੱਚੇ  ਰਖਣੇ ਹਾਏ  ਪਰ  ਇਸ  ਪ੍ਯਾਸ   ਤੇ  ਉਸ   ਬਾਤ  ਵਿਚਲਾ  ਫਾਸਲਾ 'ਜੇ  ਬਹੁਤ  ਹੀ  ਪ੍ਯਾਸ  ਹੈ  ਤਾ  ਮੇਟ  ਦੇਵਾਂ ' ਉਸ  ਕਿਹਾ ਰਿਸ਼ਤਯਾਂ  ਤੇ   ਰਿਸ਼ਤਯਾਂ  ਦੇ  ਘਾਤ  ਵਿਚਲਾ  ਫਾਸਲਾ ਧਰਮ  ਹੈ   ਇਖਲਾਕ  ਹੈ  ਕਾਨੂਨ  ਹੈ  ਇਹ  ਕੌਣ  ਹੈ ਮੇਰੀਆਂ  ਬਿਰਖਾਂ ਤੇ  ਤੇਰੀ  ਬਰਸਾਤ  ਵਿਚਲਾ  ਫਾਸਲਾ ਉਸ  ਦਿਯਾਂ  ਗੱਲਾਂ  ਸੁਨੋ  ਕੀ  ਰੰਗ  ਕੀ  ਕੀ  ਰੋਸ਼ਨੀ ਹਾਏ  ਪਰ  ਕਿਰਦਾਰ  ਤੇ  ਗੱਲਬਾਤ  ਵਿਚਲਾ  ਫਾਸਲਾ ਜ਼ਹਰ...

Dr. IQBAL (Author Of " सारे जहां से अछा हिंदुस्तान हमारा " )

    मस्जिद   तो   बना   दी   शब्   भर   मे इम़ा    की   हरारत   वालो   ऩे मन   अपना   पुराना   पापी   है बरसो   में   नमाज़ी   बन   न   सका क्या   खूब   अमीरे - ऐ - फैसल   को सुनवासी   ऩे   पैगाम   दीया तू   नामो - नसब का   हिजाजी   है पर   दिल   का   हिजाजी   बन   न   सका तर   आंखें   तो   हो    जाती   है पर क्या   लज्जत   उस   रोने   में जो चश्मे   दिले   की   अमेज़श   से ये   अश्क   पियाजी   बन   न   सका इक़बाल    बड़ा    उपदेशक   है बन   बातो मे   मोह   लेता है गुफ्तार   का   गाजी   तो   ये   बना किरदार   का   गाजी   बन   न   सका          ...